दिल्ली शराब घोटाले मे जेल गये दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार मे रहे अन्य वरिष्ठ सदस्यों के जेल जाने के बाद अब पार्टी के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है ।अगर केजरीवाल और उनके साथियों पर दोष सिद्ध हो जाता है और उन्हें सजा हो जाती है तो पार्टी के अस्तित्व को बचाना उनके लिए काफी मुश्किल हो जायेगा परिणामतः पार्टी टूट कर बिखर सकती है।
अरविंद केजरीवाल के साथ उप मुख्यमंत्री मनीष शिशोदिया एवं कैविनेट मंत्री सत्येंद्र जैन के जेल मे होने के कारण चुनावी मौसम मे पार्टी के अन्दर नेतृत्व को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुयी है हालांकि अरविन्द केजरीवाल की जिद है कि वे त्यागपत्र नहीं देंगे तथा जेल से ही सरकार चलायेंगे। केजरीवाल की रणनीति है कि वह मुख्यमंत्री बने रहेंगे और बाहर उनकी पत्नी उनसे परामर्श लेकर बाहर पार्टी एवं सरकार का कामकाज देखती रहेंगी। परन्तु अरविंद केजरीवाल के एक अन्य सदस्य राज्य सभा सांसद संजय सिंह को अदालत ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी । संजय सिंह की जमानत ने अरविंद केजरीवाल का खेल खराब कर दिया। चूंकि संजय सिंह पार्टी के वरिष्ठ सहयोगी हैं तथा अरविंद केजरीवाल और मनीष शिशोदिया के बाद पार्टी मे तीसरे नं के नेता हैं अतः चुनावी माहौल मे केजरीवाल द्वारा उनकी अनदेखी करना काफी मुश्किल होगा । दूसरी तरफ उनपर इस्तीफा देने का भी दबाव बनता जा रहा है। अब अगर केजरीवाल इस्तीफा देते हैं तो सरकार का कामकाज चलना मुश्किल हो जायेगा तथा यह भी संभावना हैं दिल्ली राष्ट्रपति शासन की तरफ चली जाय । महत्वपूर्ण बात यह भी है की संजय सिंह को अभी सिर्फ जमानत मिली है बरी नहीं हुए हैं। इसके अतिरिक्त पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को भी ईडी के अधिकारी अपनी कस्टडी मे ले सकते हैं इस लिये सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है की अगर इन सभी का दोष सिद्ध हो जाता है और वे बाहर नहीं आ पाते तो पार्टी का भविष्य क्या होगा , इसके अतिरिक्त 2025 मे दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी होना है इस लिए यह कहने मे कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अगर ये बडे नेता लम्बे समय के लिए जेल चले गये तो पार्टी का टूटना लगभग तय है । इसके अतिरिक्त दिल्ली की जनता मे भी अरविंद केजरीवाल की विश्वनीयता तेजी से कम होती जा रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केजरीवाल द्वारा लगातार यह प्रयास किये जाते रहे हैं कि दिल्ली की जनता का सहानुभूति हासिल करके उन्हें केन्द्र सरकार के विरोध मे सडकों पर उतारा जा सके। परन्तु अब दिल्ली की जनता भी यह बात समझने लगी है कि भ्रष्टाचार और शुचिता की राजनीति करने सत्ता मे आये केजरीवाल पर भ्रष्टाचार का आरोप और पार्टी के अन्य नेताओं द्वारा लगातार झूठ बोलने और अपने को निर्दोष साबित करने का प्रयास केजरीवाल की साजिश ही है इसी लिए उनके लाख प्रयास करने के बावजूद जनता अब तक आहत है और अपने को ठगा महसूस कर रही है । यही कारण है कि केजरीवाल के साथ साथ आज आम आदमी पार्टी के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।